WHO SAYS YOU CAN’T? YOU DO Daniel Chidiac Book In Hindi

About Book

क्या आप थक नहीं गए, अपने दोस्तों और परिवार के नेगेटिव शब्दों को सुनकर ? दूसरों के साथ compare किए जाने से? आप लाइफ में ‘क्या नहीं कर सकते’ उसे सुनकर थक गए हैं?

अगर आपका जवाब हाँ है तो आपकी चिंता अब खत्म होगी क्योंकि यह समरी आपके लिए सब बदल देगी। यह आपको, ख़ुद को और भी अच्छे से जानने में मदद करेगी। यह आपको बताएगी की लाइफ में बहुत सारी लिमिट्सहैं जिन्हें तोड़ा जा सकता है और लाइफ हमेशा ग्रोथ और डेवलपमेंट के बारे में है।

तो आइए बिना किसी बाउंड्री और रेस्ट्रिक्शन की दुनिया में चलते हैं।

इस समरी को किसे पढ़ना चाहिए?

कॉलेज स्टूडेंट्स

यंग प्रोफेशनल्स

मिलेनियल्स

जिस किसी को भी इंस्पिरेशन की जरूरत है

इंट्रोडक्शन

हम जैसा बर्ताव करते हैं वैसा क्यों करते है? हमारी वैल्यूज के पीछे का कारण क्या है? सब लोग इतने अलग क्यों हैं? क्यों कुछ लोग दिन भर प्रोडक्टिव रहते हैं और कुछ लोग घंटे भर के लिए भी प्रोडक्टिव नहीं रह पाते? क्यों कुछ लोग इतने मोटिवेटेड होते है? एक बेहतर इंसान कैसे बना जा सकता है? सक्सेस पाने के लिए आपको लाइफ में कौन सी स्ट्रैटेजी अपनानी चाहिए? आप जैसी चाहते है वैसी लाइफ कैसे बना सकते है?

डैनियल चिडियाक ने अपने करियर की शुरुआत में कसम खाई थी की वो इन सवालों के जवाब ढूंढ़कर ही रहेंगे। किसी भी एस्पाइरिंग एंटरप्रेन्योर की तरह ही, डैनियल ने भी जब शुरुआत की थी तब उनके पास कुछ भी नहीं था। डैनियल के एक्सपीरियंस कुछ इस तरह थे जहां उनके ना जॉब थी, न कोई मोटिवेशन, ना जीवन जीने की चाह, उनकी लाइफ में

सब कुछ उथल पुथल चल रहा था। वह अपना पर्पस जानना चाहते थे, वह दुनिया पर अपना इम्पैक्ट छोड़ना चाहते थे, लेकिन वह नहीं जानते थे कि कैसे। अगर आप भी ऐसी ही सिचुएशन में हैं तो आराम से बैठ जाइये और रिलैक्स कीजिए। यह समरी आपको बताएगी कि कैसे डैनियल ने ख़ुद को जीरो से हीरो में बदल दिया था। ये समरी आपको सिखाएगी कि आपके एक्सपीरियंस का आपके सक्सेस में बहुत बड़ा योगदान होता है। ये दूसरों की इच्छा के बजाय आपको अपने टर्म्स पर लाइफ जीना सिखाती है। ये आपको सच्ची ख़ुशी पाने में मदद करेगी। आने वाले चैप्टर्स में आप सीखेंगे कि डैनियल ने अपनी लाइफ को बदलने के लिए क्या-क्या कदम उठाए थे। सेल्फ डिस्कवरी (SELF DISCOVERY) आप हर दिन कितनी बार टीवी देखते है? उन एडस, ड्रामा और फिल्मों को देखते हुए सभी तरह के प्रोफेशन और कमर्शियल को देखने से हमें एंटरटेनमेंट मिलता

है, राइट?

अब, यह बताइये कि आपने कितनी बार किसी को खाना बनाते, कार चलाते, या टायर ठीक करते देखा है? शायद एक से ज्यादा बार ? पांच बार? शायद दस बार भी? तो जान लीजिए कि चाहे आप कितनी भी देर तक या कितनी बार भी किसी को कुछ करते हुए देखेंगे तो भी आप तब तक कुछ नहीं सीखेंगे, जब तक आप ख़ुद उसे करने की कोशिश ना करें।

इसलिए, सेल्फ डिस्कवरी के पहले स्टेप में सिर्फ कुछ पढ़ लेना या जान लेना काफी नहीं है. कुछ समय बाद आप उसे भूल जाएँगे इसलिए उसे खुद try करना बहुत ज़रूरी है. सेल्फ डिस्कवरी एक छोटे से टास्क से शुरू होती है जो है

सवाल पूछना. दिन में एक बार इस छोटे से टास्क को करने के लिए टाइम निकलना, आपके फ्यूचर पर बड़ा इम्पैक्ट डालेगा। सवाल पूछकर और एक्शन लेकर आप अपनी लिमिटेशंस और बाउंड्री से आगे बढ़ जाएंगे। अब, पहले सवाल पर चलते हैं।

मैं कौन

एक ऐसे सवाल से शुरू करें जो आपकी आइडेंटिटी और ग्रोथ को जानने में मदद करे। इस सवाल का जवाब ढूंढ़ते वक्त, अपने ब्रेन में और कोई थॉट ना आने दें। अपने अंदर ध्यान से देखें और इन सवालों का जवाब दें

क्या मैं दयालु हूँ?

क्या मैं बहादुर हूँ?

क्या मैं हेल्पफुल हूँ?

क्या मैं दूसरों के बारे में सोचता हूँ?

अपने पॉजिटिव qualities की लिस्ट बनाएं और उसे बार-बार पढ़ें। जब आप सवालों को बार-बार पढ़ेंगे तो आपका ब्रेन नैचुरली आपके लाइफ के मोमेंट्स और मेमोरी को याद करने लगेगा। आपको ऐसा एक्सपीरियंस याद आ सकता है जहाँ आप बड़ी दया के साथ पेश आए थे या दूसरों के बारे में पहले सोच रहे थे. आपको ऐसे भी पल याद आ सकते हैं जब आप किसी के साथ बहुत rude थे या आप बहुत ज्यादा डरे हुए थे।

अगर आपको बुरी बातें ही याद आ रही है, तो कोई बात नहीं। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि आपका ब्रेन बुरे एक्सपीरियंस

को पहले याद करता है। आपका ब्रेन ऐसा इसलिए क है क्योंकि आप ख़ुद अपने साथ ऐसे ही पेश आते हैं। आप अपनी गलतियों के लिए खुद को सजा देते हैं और खुद को नेगेटिविटी से भर लेते हैं।

लेकिन यह समरी आपको याद दिलाएगी कि आपने सिर्फ गलतियां नहीं की है। अंदर से आप भी यह जानते है कि आप ऐसे इंसान नहीं है। इसलिए एक बार फिर सवालों को पढ़े और फिर से सोचें। यह सोचने की कोशिश करें कि आप कितनी बार बुरे के बजाय एक अच्छे इंसान रहे हैं। उन पलों के बारे में सोचें, जहां आप दयालु, हेल्पफुल, और लविंग थे और उस मोमेंट में फील हुई इमोशंस पर फोकस करें। अगर आप हमेशा इन मेमोरीज को ध्यान में रखेंगे तो आप अच्छा फील करेंगे, अधूरा फील नहीं करेंगे। हालांकि, अगर आपको लगता है कि आप अभी तक ऐसे इंसान नहीं बने हैं, तो अपने आप से पूछें कि आप कैसे खुद को बदल सकते है। यहाँ पर गोल सिर्फ यह पता करना नहीं है कि आप एक इंसान के तौर में कैसे है। इस समरी का पर्पस आपको ऐसा इंसान बनने की हिम्मत देना भी है, जो आप सच में है बिना किसी टाइटल, उम्मीदों या जिम्मेदारियों के। “आई” और “मी” में बहुत फर्क होता है। मी हमारी बाहरी आइडेंटिटी यानी पहचान है जैसे बेटा, बेटी, टीचर, मदर, दोस्त या लवर। यह हमारी आइडेंटिटी का एक पार्ट है जिसे हम दूसरे लोगों को दिखाते हैं, एक पार्ट जिसे हम सच मानते हैं। दूसरी ओर, आई हमारी वो आइडेंटिटी है, जो हमें अकेले होने पर दिखती है। जब आप बिना किसी अचीवमेंट, एक्सपेक्टेशन और रिस्पांसिबिलिटी के होते हैं तब आप कौन हैं?

आई आपकी इंटरनल यानी अंदर की पहचान को दिखाती है। यह आपके स्टेटस, माहौल या लोगों पर डिपेन्ड नहीं करता है। यह जानने के लिए कि आप कौन हैं, यह जानना जरूरी है कि आप क्या है, न सिर्फ़ लोग आपको क्या बनाना चाहते है। अब सवालों वाले लिस्ट पर जाइए जो हमने पहले बनाई थी और “क्या मैं ” को हटाकर ” मैं हूँ” में बदल दीजिए। अब आप फ़र्क देख सकते हैं मैं हेल्पफुल हूँ –

मैं दयालू हूँ

मैं ईमानदार हूँ

मैं बहादुर हूँ

अपनी उन क्वालिटीज़ को याद कीजिए जो आपको अलग

बनाती है। भूल जाइये जो दुनिया ने आपको आपके बारे में

बताया है और अपने दिल को फॉलो कीजिए। एक अलग

माइंडसेट यानी नज़रिया रखने पर फोकस कीजिए।

अपने आप से कहे सारे नेगेटिव शब्द भूल जाइये और ख़ुद से

प्यार करना शुरू कीजिए। अपने आप को देखने का तरीका

बदलने से आपकी लाइफ बदल जाएगी।

यह चैप्टर यह जानने के लिए है कि आप अपने आप से क्या-क्या झूठ बोल रहे थे, ये आपको आप के अंदर की सच्चाई को महसूस भी करवाएगी। लोग आपके बारे में सब कुछ नहीं जानते और उन्हें गलत साबित करने का वक़्त आ गया है।

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