Steve Jobs Founder Of Apple

जब भी दुनिया के महान इंटरप्रेन्योर का नाम लिया जाता है, तो Steve Jobs का नाम शीर्ष श्रेणी में आता है, आज वो हमारे बीच में नहीं है लेकिन उनकी प्रभावशाली सोच के नतीजे आज भी हमारे बीच उन्हें ज़िंदा रखे हुए है । Steve Jobs का जन्म एक अविवाहित दंपति के घर हुआ जो पढ़े-लिखे नही थे, उनकी माँ चाहती थी कि Steve को पढ़े-लिखे माँ-बाप मिले जो Steve को भी पढ़ा लिखा सके लेकिन Steve को Paul और Kalra Jobs ने गोद ले लिया जो खुद पढ़े-लिखे नही थे और ग़रीब भी थे।

जब Steve बड़े हुए तो उन्होंने Reed कॉलेज में दाखिला लिया और समय पर फ़ीस न देने के कारण उन्हें कॉलेज से निकाल दिया गया और कुछ समय के लिए वो घर भी छोड़कर चले गए ।उसी दौरान वो अपने दोस्तों के घर सोते थे और काँच की बोतल बेच कर और मंदिर के लंगर का खाना खाकर अपनी ज़िंदगी गुज़ार रहे थे ।उसी दौरान वो उनके कॉलेज के दोस्त Daniel Kottke के कहने पर अध्यात्म की खोज के लिए भारत में नीब करौरी बाबा के आश्रम (कैंची धाम, नैनीताल गए और 7 महीने भारत में रहकर फिर से अमेरिका चले गए ।

अमेरिका जाकर वो Atari नाम की गेमिंग कंपनी में जॉब पर लग गए और उसी दौरान उनकी प्रेमिका से उन्हें लड़की हुई जिसका नाम Lisa है जिनके नाम पर बाद में कंप्यूटर भीबना।काफ़ी समय डिप्रेशन और ग़रीबी से जुझने के दौरान वो एक दिन उनके दोस्त Steve Wozniak के घर पहुँचे, जहाँ उन्हें एक कंप्यूटर दिखाई दिया और Steve उस कंप्यूटर से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने अपनी कंपनी बनाने की ठान ली और 1 अप्रेल 1976 को Steve Jobs, Steve Wozniak और उनके साथियों ने मिलके Jobs के घर के गेराज में कंप्यूटर बनाने स्टार्ट किये और पहले कंप्यूटर का नाम Apple One रखा गया ।

Apple One की सफलता के बाद उन्होंने 1977 में Apple 2 का निर्माण किया जो इतना सफल साबित हुआ कि 1993 तक बिका और तब तक 50 लाख से ज़्यादा कंप्यूटर बिक गए थे और उन्होंने सफलता की ऊँचाइयों को छू लिया।1979 में उन्होंने Mouse बनाया और ग्राफ़िकल यूज़र इंटरफ़ेस का निर्माण किया, 1983 में Lisa नाम का कंप्यूटर बनाया जो असफल रहा, जिससे उन्हें काफ़ी निराशा मिली। असफलता के पीछे अहम कारण ये था कि वो मार्केटिंग पर ध्यान नही दे पा रहे थे, तभी उनकी मुलाकात John Sculley से हुई जो पेप्सिको के मार्केटिंग हेड थे।

Jobs ने Scully को Apple में हायर किया, ताकि वे मार्केटिंग का काम संभाल सके और वहीं Jobs एक विज़िनरी थे, इसी बीच 1985 मे दोनों की सोच में फ़र्क के कारण मतभेद इतने बढ़ गए कि बोर्ड मीटिंग में Jobs को Apple के प्रमुख पद से हटा दिया गया। ऐसी निराशाजनक स्थिति में टूटने की बजाय उन्हें उसमें भी संभावनाए नज़र आई और उन्होंने Apple का एक शेयर अपने पास रखकर बाकी सारे शेयर बेच दिए और उन पैसों से NeXT नाम की कंपनी की शुरुआत की तथा Pixar Animations के आधे से ज़्यादा शेयर खरीद लिए।

करीब 11 साल बाद 1996 में Apple के पास कोई बेहतर प्रोडक्ट ना होने की वजह से उसकी मार्केट वैल्यू गिरने लगी, वहीं Jobs अपनी कंपनी NeXT में एक बेहतर कंप्यूटर बनाने में लगे हुए थे, तभी Apple ने NeXT को खरीदने का प्रस्ताव रखा और कंपनी को खरीद लिया जिससे Apple को बेहतर कंप्यूटर मिल गया और Steve को अपनी Company वापस मिल गयी।फिर आने वाले सालो में Jobs ने Ipod, Itunes और Iphone जैसे बेहतर प्रोडक्ट लाकर Apple को दुनिया की सबसे वैल्युएबल कंपनी बना दी ।

5 अक्टूबर 2011 को पैंक्रिएटिक कैंसर के चलते Steve Jobs का निधन हो गया ।मेरा व्यक्तिगत रूप से ये मानना है की Jobs के जाने के बाद Apple और उनके प्रोडक्ट्स में कोई विशेष बदलाव नहीं आया है क्योंकि एक दृढ़ सोच और विज़िनरी का अंत जो हो गया था | वो कम चीज़ों का इस्तेमाल करके बेहतर ज़िन्दगी और साधनों का निर्माण करना जानते थे ।

सादगी में सुंदरता देखने का उनका नज़रिया उन्हें बाकी बिज़नेसमैन से अलग करता है, जो मैडिटेशन की देन है, उन्होंने अपनी सोच, कल्पना और इच्छा शक्ति को इतना बढ़ा दिया था कि वे किसी भी चीज़ का परिणाम अपनी सोच से निकाल देते थे। उनके हिसाब से महान बनने का एक ही तरीका था Hippy बने रहो ।

“Stay Hungry, Stay Foolish.”- Steve Jobs

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