Ratan Tata Founder Of The TATA Group

Ratan Tata एक इंडियन बिज़नेसमैन हैं जो अपने प्रिंसिपल्स, अपने बिज़नेस करने के तरीके के लिए जाने जाते हैं जिनका मतलब बिज़नेस से सिर्फ़ पैसे कमाना नहीं होता बल्कि अपने देश और देश के लोगों को अच्छी सर्विस देने से होता है। ऐसे कई इंसिडेंट्स है जिनसे ये पता चलता है कि Ratan Tata अपने फ़ायदे के लिए या दूसरे को नुकसान पहुँचा कर या अपने प्रिंसिपल्स या अपने नियम के अगेंस्ट जाकर कभी बिज़नेस नहीं करते है। शायद यही क्वालिटी हैं जो उन्हें बाकी बिज़नेसमैन से अलग बनाती है और शायद यही वजह है।

जो उन्हें “मैन विथ नो हेटर्स” बनाती हैं।Ratan Tata का जन्म सूरत के एक पारसी फ़ैमिली में हुआ, उनके पिता का नाम Naval Tata था जो Jamsetji Tata के गोद लिए हुए बेटे थे, Ratan Tata की प्राइमरी एजुकेशन कैंपियन स्कूल मुम्बई में हुई और सेकेंडरी एजुकेशन कैथेड्रल एंड जॉन केनन स्कूल से हुई । इसके बाद Tata में 1959 में कॉर्नेल यूनिवर्सिटी से आर्किटेक्चर की डिग्री हासिल की और 1975 में Harward बिज़नेस स्कूल से एडवांस मैनेजमेंट की पढ़ाईपूरी की।

पढ़ाई पूरी करने के बाद Tata ने कुछ टाइम के लिए लॉस एंजेल्स में Jones And Emmons में काम किया। 1961 में उन्होंने भारत वापस आकर Tata ग्रुप के साथ अपने करियर की शुरुआत की । शुरुआती दिनों में उन्होंने Tata Steel के शॉप फ़्लोर पर काम किया जिसके लिए उन्हें जमशेदपुर भेजा गया और Tata के और भी दूसरे कामों के साथ मे जुड़े रहे।1972 में Tata Nalco (रेडियो एंड इलेक्ट्रॉनिक) के डायरेक्टर बने उस टाइम Nalco की मार्केट में हिस्सेदारी 2% थी लेकिन 1975 के अंत तक Nalco ने अपना सारा लॉस कवर कर लिया और मार्केट की हिस्सेदारी भी 20% कर ली। 1977 में Tata ने Empress Mills को एक बड़े लॉस से बाहर लाया।

1981 में Ratan Tata, टाटा इंडस्ट्रीज़ के प्रेज़िडेंट बने और 1991 में JRD Tata ने टाटा एंड संस के प्रमुख पद का उत्तराधिकारी Ratan Tata को बनाया, तभी से Ratan Tata ने अपने काम करने के तौर तरीके को दुनिया के सामने लाया और आज Tata जिस मुक़ाम पर है, उसमें Ratan Tata का बहुत बड़ा रोल है, उन्होंने इस कंपनी को कई लॉस से बाहर निकाल कर आज दुनिया की सबसे बड़ी कंपनीज़ में से एक बना दिया है।Ratan Tata की जैगुआर और लैंड रोवर कार को खरीदने की स्टोरी काफ़ी दिलचस्प है।

1999 में जब Tata Detroit, मिशिगन में अपनी पैसेंजर व्हीकल के बिज़नेस को सेल करने के लिए गए तब फ़ोर्ड के चेयरमैन Bill Ford ने उन्हें अपमानित शब्द कहे और उसके ठीक 9 साल बाद समय कुछ ऐसा बदला की Ford को दिवालिया का सामना करना पड़ा और Tata ने उनकी आइकोनिक ब्रांड जैगुआर लैंड रोवर को 2.3 बिलियन डॉलर में खरीद लिया। उसके बाद Bill Ford ने उनका धन्यवाद भी किया और कहा कि उन्होंने Ford को दिवालिया होने से बचा लिया।

अगर उनके कार के बिज़नेस की बात करे तो पूरी तरह से भारत में बनी भारत की पहली पैसेंजर कार Indica को लॉन्च किया, फिर 23 मार्च 2009 को उन्होंने Tata Nano कार को लॉन्च किया, जिसके प्रोडक्शन की मदद से उनका एक ही मक़सद था कि वो ज़्यादा से ज़्यादा रोजगार लोगों को दे सके और कार को इतना सस्ता बनाया जा सके ताकि ज़्यादा से ज़्यादा लोगों का कार ख़रीदने का सपना पूरा हो सके, इसे दुनिया की सबसे सस्ती कार मानी जाती हैं।

28 दिसंबर 2012 को उन्होंने Tata ग्रुप से रिटायरमेंट ले लिया, उन्होंने Tata के साथ 50 साल तक काम किया और देश के प्रति सेवाओं को देखते हुए भारत सरकार ने उन्हें साल 2000 में पद्म भूषण से सम्मानित किया और 2008 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया।उसी साल 2008 में उन्हें टाइम मैगज़ीन ने दुनिया के 100 प्रभावशाली व्यक्तियों की लिस्ट में शामिल किया और रिटायर होने के बाद आज भी अगर देश किसी मुश्किलों में होता है तो वो डोनेशन के द्वारा हेल्प करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं।

“I don’t believe in taking right decisions. I take decisions and then make them right.”- – Ratan Tata

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