Nelson Mandela Biography in hindi

Africa ke mahatma gandi

अफ्रीका के महात्मा गाँधी कहे जाने वाले Nelson Mandela को Peacemaker के रूप में जाना जाता है, जिन्होंने रंगभेद के खिलाफ लड़ने में अपनी पूरी लाइफ़ देदी, जिनका काम इतना प्रभावशाली था कि उनके जन्मदिन 18 जुलाई को मंडेला दिवस के रूप में जाना जाने लगा। Nelson Mandela का जन्म 18 जुलाई 1918 को Mwezo, साउथ अफ्रीका में हुआ।

उनके पिता का नाम Henry Mphakanyiswa था जो Mwezo टाउन के लोकल चीफ़ और काउंसिलर थे । Mandela उनके पिता के 13 बच्चों में से तीसरे नंबर पर थे, उनके नाम के आगे Mandela उनके दादाजी के नाम से आया । Mandela ने अपनी स्टार्टिंग की पढ़ाई वहाँ के स्थानीय मिशनरी स्कूल से कम्पलीट की और जब Mandela 12 साल के थे तो उनके पिता की डेथ हो गयी।

Mandela ने तीन शादियाँ की जिससे उन्हें कुल 6 बच्चे हुए, अक्टूबर 1944 को उन्होंने उनके फ्रेंड और एक्टिविस्ट Walter Sisulu की बहन Evelyn Mese से शादी कर ली। 1958 में Mandela ने अपनी दूसरी शादी Winnie Madikizela से की और तीसरी शादी Graca Machel से 80 साल की उम्र में कई |

1943 में अपनी BA की डिग्री पूरी करने के बाद Mandela अफ्रीकन नेशनल कांग्रेस में कार्यकर्ता के रूप में काम करने लग गए और 1944 में ANC यूथ लीग के को-फाउंडर बने, उसके बाद Mandela अपने दोस्त Oliver Tambo के साथ जोहानिसबर्ग अपनी लॉ की पढ़ाई करने चले गए और वहाँ जाकर रंगभेद के खिलाफ आवाज़ भी उठाई और इसी क्रम से 1956 में Mandela और उनके साथ 155 कार्यकर्ताओं के खिलाफ मुकदमा भी चलाया गया, जो चार सालों बाद क्लोज़ किया गया।

1960 में उनकी पार्टी ANC पर प्रतिबंध लग गया, लेकिन वो अकेले ही अपने काम में लगे रहे और वित्तीय संकट को लेकर अभियान चलाया और 5 अगस्त 1962 को वहाँ के स्थानीय मजदूरों को स्ट्राइक के लिए उकसाने के लिए उन्हेंअरेस्ट कर लिया गया। Mandela पर उस केस पर आखिरी सुनवाई 1964 में हुई जिसमें उन्हें मौत की सज़ा सुनाई गई और बाद में अपना डिसीज़न बदलकर उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गयी ।

इसी के चलते उन्हें अपने देश मे रंगभेद के खिलाफ लड़ते हुए अपनी लाइफ़ के 27 साल जेल में बिताने पड़े। उनको 1990 तक जेल में रहना पड़ा और जेल में बाकी कैदियों की तरह उन्हें मज़दूरी का काम करना पड़ा, उस वक़्त वो अपने जीवन पर एक बुक भी लिख रहे थे और वो बुक Mandela के जेल से बाहर आने के चार साल बाद 1994 में पब्लिश हुई जिसका नाम “Long Walk To Freedom” है।

27 साल जेल में रहने के बाद भी उनके इरादे नहीं बदले थे, उनके दिमाग़ में सिर्फ़ देश मे रंगभेद के खिलाफ अहिंसा के साथ लड़ना था। जेल से आने के बाद Mandela ने अफ्रीका के कई देशों की यात्रा की और गोरों की सरकार से समझौता करके डेमोक्रेटिक अफ्रीका की नींव रखी, अंत में 10 मई 1994 को Mandela अपने देश के पहले प्रेज़िडेंट बने।

महात्मा गाँधी की अहिंसा की विचारधारा ने Mandela पर काफ़ी असर डाला था और वो अपने जीवन मे गाँधी के प्रभावक विचारों की बात किया करते थे। 2007 में नई दिल्ली में हुए सम्मेलन में उन्होंने बताया कि अफ्रीका को अश्वेत लोगों से आज़ाद और रंगभेद खत्म करने में गाँधीजी की विचारधारा का अहम रोल है और उनकी वजह से ही इन समस्या का सॉल्यूशन हो सका है, शायद इसीलिए उन्हें दुनिया के दूसरे गाँधी के रूप में जाना जाता है ।

5 दिसंबर 2013 को 95 साल की उम्र में लंग्स में इम्फेक्शन के कारण उनके रेज़ीडेंस जोहानिसबर्ग में उनकी डेथ हो गयी। Mandela ने अफ्रीका के लोगों के लिए अपनी ज़िंदगी के 67 साल दे दिए और उनमें से 27 साल जेल में बिताए, उसके बाद भी अपने विचारों को इतना तीव्र और हिंसा का सहारा न लेकर उन्होंने वहाँ की पब्लिक के लिए वो कर दिखाया जो आज़ादी के बाद किसी ने नहीं किया, उनके इस काम के लिए उन्हें 1993 में नोबेल पीस प्राइज़ से सम्मानित किया गया जो दुनिया का सर्वोच्च पुरुष्कार है।

उन्हें अमेरिका में प्रेज़िडेंशियल मेडल ऑफ फ्रीडम से भी नवाज़ा गया और 1990 में उन्हें भारत रत्न दिया गया, Mandela दूसरे नॉन इंडियन है और पहले अफ्रीकन है । जिन्हें भारत रत्न से नवाज़ा गया, जो भारत का सबसे बड़ापुरुष्कार है।

“It always seems impossible until it’s done.” Nelson Mandela

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