Martin Luther King Junior Biography In Hindi

Martin Luther King को अमेरिका का महात्मा गाँधी कहा जाता है क्योंकि उन्होंने अमेरिका में रह रहे काले लोगों को अधिकार दिलवाने के लिए बहुत संघर्ष किया। उन्हें अमेरिकन सिविल राइट्स मूवमेंट्स का हीरो भी कहा जाता है। उनकी डेथ के टाइम उनकी उम्र सिर्फ़ 39 साल की थी और पोस्टमॉर्टेम में डॉक्टर्स ने बताया कि उनके दिल की हालत तनाव के कारण एक 65 साल के आदमी जैसी हो गयी थी।

Martin Luther King Junior का जन्म 15 जनवरी 1929 को एटलांटा में हुआ, उनके पिता का नाम Martin Luther King Senior था और उनकी माँ का नाम Alberta Williams Kings था । Martin उन्ही में अफ्रीकन ग्रुप के वंशज थे जो अमेरिका में पीढ़ियों से मज़दूरी का काम करते आ रहे थे, जिन्हें गोरे अमेरिकन हमेशा मज़दूर बनाकर ही रखना चाहते थे ।

गोरे अमेरिकन्स चाहते थे कि काले लोगों को उनके बराबर न माना जाए, उन्हें उनके बराबर के अधिकार नहीं मिलने चाहिए, Luther King की लड़ाई भी उन्ही अधिकार को लेकर थी। Junior एक ब्राइट स्टूडेंट थे और वो बहुत अच्छे स्पीकर भी थे, वो अपनी बातों से लोगों को अट्रैक्ट करना जानते थे।

एक बार की बात है जब Junior स्कूल में थे और उस वक़्त उनके पिता चर्च में पादरी थे और उनकी माँ भी काम की वजह से बाहर ही रहती थी, ऐसे में उनको कहा गया कि वो घर रहकर उनकी दादी का खयाल रखें लेकिन ऐसा हुआ नहीं Junior अपनी दादी का खयाल रखने की बजाय अपने किसी काम में बिज़ी हो गए, वो अपने काम मे इतने घुस गए कि उन्हें ये पता ही नहीं रहा कि उन्हें उनकी दादी का खयाल भी रखना है।

उसी समय उनकी दादी को हार्ट अटैक आया और उनकी डेथ हो गई और Junior को लगने लगा कि उनकी दादी की मौत के ज़िम्मेदार वो हैं और इसी बीच वो इतने डिप्रेशन में चले गए कि उन्होंने अपने घर के सेकंड फ्लोर से छलांग लगा दी, लेकिन उनकी जान बच गयी । वो बचपन से ही से बहुत गंभीर प्रवर्ती के थे और उनमें हर चीज़ की ज़िम्मेदारी लेने की काबिलियत थी।

अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और अमेरिका के नीग्रो लोगों के साथ हो रहे भेदभाव को लेकर एक आंदोलन चलाया जो सक्सेसफुल रहा, 1955 में उनकी शादी हुई और उसी साल उनकी लाइफ़ में एक बड़ा मोड़ आया। उस टाइम अमेरिका में ये कानून था कि जब कोई नीग्रो व्यक्ति बस में सफ़र कर रहा होता है और उसी समय कोई गोरा व्यक्ति उस बस में आ जाता है ।

तो नीग्रो व्यक्ति को उठकर गोरे व्यक्ति को सीट देनी पड़ती थी, इसी रूल के कारण एक औरत ने उस कानून का विरोध किया और अपनी सीट से खड़ी नही हुई और इसी कारण से उसको अरेस्ट कर लिया गया। इस इंसिडेंट से Junior ने बस बॉयकॉट मूवमेंट चलाया, 381 दिन तक चले इस मूवमेंट ने बस में काले और गोरों के बीच में अलग-अलग सीट रखने के कानून दिया हटा गया।

इसी रूल को ख़त्म करने के लोए उन्होंने अमेरिका के दूसरे स्टेट्स में भी रीजनल मिनिस्टर से बात की और नॉर्थ अमेरिका के साइड भी इस कानून को ख़त्म करवाया। 1957 में वो अपने पिता के साथ चर्च में काम करने एटलांटा गए और काले लोगों को वोटिंग का अधिकार, Racism और कई नागरिक अधिकार को दिलाने के लिए 1963 में Birmingham Campaign चलाया, जो 2 महीने तक चला। उसके अलावा उन्होंने 1968 में Saint Augustine, Florida, Selma, Alabama में नीग्रो को अधिकार दिलाने के लिए कई कैंपेन चलाये। इस दौरान हर एक मूवमेंट के लिए Martin Luther King को अरेस्ट किया गया था।

1963 में एक सबसे बड़ा मार्च हुआ जिसे Martin Luther King ने चलाया था, ये मार्च स्कूल में होने वाले भेदभाव और रोजगार दिलाने के लिए चलाया गया था। उस टाइम नीग्रो को गोरे लोगों की तुलना में कम सैलरी दी जाती थी जिसके चलते उन्होंने बराबर सैलरी पाने की मांग रखी, Luther King के प्रयास सफ़ल हुए और उनकी मांग को सरकार ने एक्सेप्ट किया। Lincoln Memorial पर उन्होंने एक जबरदस्त स्पीच दी, जिसका नाम “I Have A Dream” है जो एक हिस्टोरिकल स्पीच है।

उन्होंने नॉर्थ के लोगों को अधिकार दिलाने के लिए शिकागो की यात्रा भी की और वहाँ भी लोगों के लिए कैंपेन चलाये लेकिन वहाँ की कंडीशन ज़्यादा खराब थी और Luther King को मिली धमकियों की वजह से उन्हें वापस लौटना पड़ा। उन्होंने वियतनाम और अमेरिका के बीच हो रहे युद्ध के ऊपर भी बियॉन्ड वियतनाम नाम का स्पीच दिया क्योंकि Luther King नहीं चाहते थे कि उनके बीच युद्ध हो क्योंकि युद्ध में खर्च होने वाले पैसों को लोगों के हित मे यूज़ किया जा सकता था।

1959 में Martin भारत आये और उन्होंने न्यूज़पेपर में कई आर्टिकल्स लिखे, उन्होंने 1958 में “Stride Towards Freedom” और 1964 में “Why We Can Not Wait” नाम की बुक भी लिखी ।1964 में उन्हें दुनिया में शांति फैलाने के लिए नोबेल पीस प्राइज़ दिया गया और Luther King उस टाइम सबसे कम उम्र के इंसान थे जिन्होंने इस प्राइज़ को जीता था । 1963 में उनके अच्छे कामों को देखकर अमेरिका की टाइम मैगज़ीन ने उन्हें मैन ऑफ़ दी ईयर भी चुना ।

उन्हें लोगों को अधिकार दिलाने के लिए काफ़ी पसंद किया जाने लगा था लेकिन उसके विपरीत गोरे लोग उनसे नफरत करते जा रहे थे क्योंकि वो लोग नीग्रो और उनके बीच के अंतर को ख़त्म नहीं करना चाहते थे, 29 मार्च 1968 को Luther Racism की मांग के चलते Tennessee गए और 3 अप्रैल 1968 को उन्होंने वहाँ लोगों को स्पीच दी । उसी दौरान 4 अप्रैल 1968 की सुबह वो अपनी होटल की बालकनी में खड़े थे और तभी उनकी गोली मारकर हत्या कर दी गयी और उनकी मौत के कारण सिविल राइट्स को एक अलग स्पीड मिल गयी, जिसके कारण उनके चलाये गए कैंपेन को दबाव में आकर सरकार को स्वीकार करना पड़ा।

“The time is always right to do what is right.” – Martin Luther King Junior

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