APJ Abdul Kalam A Missile Man

इंडिया को न्यूक्लियर पॉवर बनाने में अगर किसी का रोल है तो वो हैं इंडिया के 11th प्रेज़िडेंट Dr. APJ Abdul Kalam, जो ‘The Missile Man Of India’ के नाम से भी जाने जाते हैं। ग़रीब और अनपढ़ परिवार में पैदा होना किसी को महान बनने से नहीं रोक सकता यह हमें Dr. APJ Abdul Kalam से सीखने को मिलता है और इसी के साथ उनकी लाइफ़ स्टोरी से हमें और भी बहुत कुछ सीखने को मिलता हैं।

सिम्पलीसिटी, हार्डवर्क, देशप्रेम की भावना आपको किस मुक़ाम तक पहुँचा सकती हैं, एक महान देश का प्रेज़िडेंट तक बना सकती हैं। महान बनने के बाद भी उस सिम्पलीसिटी को बनाये रखना हमें कलाम साहब से सीखने को मिलता हैं। उन्होंने कभी अपने पद का एक परसेंट भी फ़ायदा नहीं उठाया और अपनी पूरी ज़िंदगी देश को मज़बूत बनाने में दे दी ।उन्होंने जितनी पॉवरफुल और आक्रामक मिसाइल बनाई वो खुद पर्सनली बहुत शांत और सरल स्वभाव के इंसान थे। Dr. APJ Abdul Kalam का जन्म एक बहुत ग़रीब परिवार में हुआ, जहाँ 5 भाई-बहन में से एक कलाम साहब भी थे।

उनके पिता नाव चलाते थे जिससे उनका घर चलता था, वो पढ़ाई में ज़्यादा ख़ास नहीं थे लेकिन सपने बहुत बड़े थे और देश के लिए कुछ करने की आग उनके अंदर बचपन से ही थी, उनमें नई चीज़ों को जानने की भूख बचपन से थी।ग़रीबी की वजह से वो अपनी पढ़ाई का खर्चा अख़बार बाट कर उसमें से पैसे जोड़कर उठाते थे, उन्होंने अपनी प्राइमरी स्कूल की पढ़ाई अपने गाँव की सरकारी स्कूल से की और हाई स्कूल की पढ़ाई श्वार्ट्ज हायर सेकेंडरी स्कूल से की जो उनके पड़ोस के गाँव में थी।1954 में उन्होंने St. Joseph कॉलेज से फिजिक्स में ग्रेजुएशन की फिर मद्रास इंस्टिट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी में एयरोस्पेस की पढ़ाई करने के लिए पहुँच गए, जहाँ पढ़ाई के लिए उनके पास फीस नहीं थी ।

तब उन्हें स्कोलरशिप के लिए कॉलेज से एक प्रोजेक्ट दिया गया लेकिन किसी रीज़न की वजह से वो उसे पूरा नहीं कर सके, लेकिन Kalam की ज़रूरत और उनके फ़ाइटर जेट को लेकर इंटरेस्ट को देखते हुए प्रोफ़ेसर ने उन्हें 3 दिन का एक्स्ट्रा टाइम दिया जिसे उन्होंने 3 दिनों की दिन-रात की मेहनत से पूरा कर दिया।इतनी मेहनत के बाद उन्हें स्कॉलरशिप मिल गयी और 1960 में उन्होंने वहाँ से इंजीनियरिंग पूरी की।

उनकी लाइफ़ के हर मोड़ पर मुश्किलें थी जिसे उन्होंने डेडिकेशन और मेहनत से हल किया।उसके बाद उन्हें हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड में नौकरी मिल गयी, कुछ टाइम नौकरी करने के बाद वो पायलट बनने की चाहत लिए देहरादून चले गए, जहाँ 22 लोगों में सिर्फ़ 8 लोगो को चुना गया था और वहाँ उनका एडमिशन नहीं हो सका। फिर वो दिल्ली चले गए जहाँ वो DRDO में साइंटिस्ट की पोजीशन पर जुड़े और हेलिकॉप्टर्स डिज़ाइनिंग का काम किया।

1969 में उन्हें वहाँ से ISRO भेज दिया गया, जहाँ वो प्रोजेक्ट डायरेक्टर के पद पर रहे।1980 में सरकार का एडवांस मिसाइल प्रोग्राम शुरू हुआ जहाँ उन्होंने “अग्नि” और “पृथ्वी” जैसी मिसाइल बनाई। 1998 में पोखरण न्यूक्लियर टेस्ट में कलाम साहब का मैन रोल था, इसके बाद वो स्पेस प्रोग्राम और मिसाइल डेवलपमेंट प्रोग्राम से जुड़े और वहीं से उन्हें ‘Missile Man Of India’ के नाम से जाना जाने लगा ।APJ Abdul Kalam कभी राजनीति से नहीं जुड़े लेकिन फिर भी वो 18 जुलाई 2002 को देश के सबसे बड़े पद पर पहुँचे।

उन्होंने India 2020 (A Vision For The New Millennium) नाम की बुक भी लिखी, जिसके अनुसार वो इंडिया को जिस रूप में नए डिकेड में देखना चाहते थे उस बारे में लिखा है ।कलाम साहब हमेशा देश के युवा और उनके बेहतर फ़्यूचर के अलावा कोई बात नहीं करते थे, प्रेज़िडेंट के पद से रिटायर होने के बाद वो IIT हैदराबाद में प्रोफेसर के रूप में बनारस हिन्दू यूनिवर्सिटी में रहे।इसके बाद प्रेज़िडेंट और भारत रत्न से सम्मानित होने के बाद अपनी लाइफ़ के अंत तक पूरा समय स्टूडेंट्स के बेहतर फ़्यूचर के लिए दे दिया, उनकी मौत भी बच्चों को लेक्चर देने के दौरान (IIM शिलांग ) में हुई थी ।

“You have to dream before your dreams can come true.” – APJ Abdul Kalam

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